सिकल सेल रोग (SCD) एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो भारत की आदिवासी आबादी में बड़े पैमाने पर पाया जाता है। ऐसा लगता है कि गुजरात के छोटा उदयपुर ज़िले के डुमाली गाँव की सपनाबेन अरविंदभाई (24) काफ़ी भाग्यशाली रही हैं कि वे SCD के सबसे गंभीर लक्षणों से बच पाई हैं; इन लक्षणों में समय-समय पर होने वाला असहनीय दर्द और एनीमिया शामिल हैं, जिनके इलाज के लिए रक्त चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है।
सपना, अरविंदभाई (49) और उनकी पत्नी सविताबेन (47) की चार बेटियों में से एक है; ये दोनों ही राठवा जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। राठवा लोगों के घरों की दीवारों पर अक्सर 'पिथोरा कला' देखने को मिलती है - ये राठवा और भील जनजातियों की पारंपरिक चित्रकलाएं हैं, जिन्हें अक्सर हस्तशिल्प संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जाता है। लेकिन इस खास राठवा घर में इस कला का कोई निशान नहीं दिखता, क्योंकि यह घर कच्ची ईंटों से बना है और इस पर न तो कोई प्लास्टर किया गया है, न ही इसे लीपा-पोता गया है। यह परिवार मक्का और चावल उगाकर अपना गुज़ारा करता है, जिसे अरविंद स्थानीय बाज़ार में बेचते हैं। जब हमारे इंटरव्यू लेने वाले ने उनसे पूछा कि क्या वे तेजगढ़ में स्थित 'भाषा सेंटर फॉर रिसर्च एंड पब्लिकेशन' के बारे में जानते हैं, तो उन्होंने बताया कि वे उस सेंटर से महज़ दो मील की दूरी पर ही रहते हैं। (आदिवासी अकादमी इस सेंटर की एक मुख्य परियोजना है।)
सपना भी अपनी बहनों की तरह, तेज़गढ़ में पैदल चलकर स्कूल जाती थीं। अरविंद बताते हैं, “वह 10वीं क्लास के इम्तिहान में फेल हो गई थी। उसने दो बार कोशिश की, लेकिन पास नहीं हो पाई। इसलिए उसने पढ़ाई छोड़ दी।” सपना की सेहत को लेकर कोई खास चिंता नहीं थी – वह दुबली-पतली थीं और कभी-कभी थकी हुई लगती थीं – और मयूर से शादी से ठीक पहले, जब वे करीब 20 साल की थीं, तब तेज़गढ़ में उनका ब्लड टेस्ट करवाया गया और पता चला कि उन्हें SCD है। तब से वे दवाइयाँ ले रही हैं। अरविंद कहते हैं, “उसे गोलियाँ लेनी पड़ती हैं। हम ये सरकारी अस्पताल से लाते हैं। हम जाकर एक महीने की दवाइयाँ ले आते हैं।”
खेती से होने वाली आमदनी को बढ़ाने के लिए, यह परिवार अपने घर के ही एक हिस्से में एक छोटी-सी दुकान चलाता है, जहाँ वे भजिया (पकौड़े) और समोसे बनाकर बेचते हैं। जहाँ मयूर एक कॉन्ट्रैक्ट मज़दूर है, वहीं सपना दुकान का काम संभालती हैं। काम का बोझ बाँटने के लिए परिवार का हर सदस्य हाथ बँटाता है - चाहे वह खेती का काम हो या फिर भजिया और समोसे को बेचने का।
अरविंद सोच में डूबे हुए कहते हैं, "इस साल हम अपनी एक बेटी की शादी करेंगे" । सपना की बड़ी बहन विलाशबेन (30) की शादी हो चुकी थी, लेकिन उनका तलाक़ हो गया और अब वे इसी परिवार के साथ रहती हैं। सबसे छोटी बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ रही है और उसने आर्ट्स स्ट्रीम चुनी है।