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“मैं स्पीच थेरेपी ले रहा हूँ। मैं अपने पापा के मोबाइल पर अपने पसंदीदा कार्टून देखता हूँ।”

यह जानना कि आपके बच्चे को कोई विकलांगता है, ज़्यादातर माता-पिता को परेशान कर सकता है। यह पता चलना कि उसे दो विकलांगताएं हैं, उन्हें बुरी तरह तोड़ सकता है। गुजरात के महीसागर के रहने वाले नौ साल के अमन कुमार नितिनभाई जब सिर्फ़ दो साल के थे, तब मोडासा और वडोदरा के अस्पतालों में यह पुष्टि हुई थी कि उन्हें जन्मजात रक्त विकार थैलेसीमिया और सेरेब्रल पाल्सी (CP) दोनों हैं।
 
शुरू में उनके माता-पिता को लगा जैसे आसमान टूट पड़ा हो, लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें खुद ही इस मुश्किल हालात से बाहर निकलना होगा। नितिन कुमार और मनीषाबेन, जो दोनों अब 35 साल के हैं, ने बताया कि उन्होंने कैसे धीरे-धीरे अपने बेटे की भलाई के लिए सही रास्ता खोजा।
 
थैलेसीमिया में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) की ज़रूरत होती है, कितनी बार चढ़ना पड़ेगा यह बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है, जबकि CP बोलने और चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करती है। मनीषा बताती हैं कि अमन ने तीन साल की उम्र में बैठना और पाँच साल की उम्र में चलना शुरू किया। वह केवल अपने दाहिने हाथ का इस्तेमाल कर सकता है, उसकी चाल धीमी और अस्थिर है, और एक बार बैठने के बाद वो खुद से उठ नहीं पाता। उसकी बोली कुछ दो-अक्षरों वाले शब्दों तक ही सीमित है। मनीषा कहती हैं, “वह सिर्फ़ पा-पा और डा-डा बोल पाता है; वह मा-मा भी नहीं कह पाता।”
 
दाहोद में उन्हें 'ब्लाइंड वेलफेयर काउंसिल' स्कूल में सही माहौल मिला, जहाँ अमन का दाखिला हुआ है। हिंदी में एम.ए. कर चुकीं मनीषा ने काउंसिल का स्पेशल एजुकेशन में दो साल का डिप्लोमा कोर्स पूरा किया। उन्होंने CP, बौद्धिक विकलांगता, दृष्टिहीनता और सीखने की विशिष्ट अक्षमता वाले बच्चों को संभालने का तरीका सीखा है, और इसलिए वो अपने बेटे के विकास में अहम भूमिका निभा पा रही हैं, और धैर्यपूर्वक उसे रोज़मर्रा के काम सीखने में मदद कर रही हैं। अपनी माँ और अपने टीचरों राधिका सिंह और भरत पटेल की मिली-जुली कोशिशों से, अमन ने धीरे-धीरे आसान आसान काम करना सीख लिया है। वह केवल इशारों या हरकतों से बातचीत करता है, लेकिन उनकी स्पीच थेरेपी चल रही है।
 
नितिन कुमार स्कूल में ड्राइवर के तौर पर काम करते हैं और परिवार उसी परिसर में बने दो कमरों के घर में रहता है। नितिन बताते हैं कि राजकोट के एक डॉक्टर ने थैलेसीमिया की दवाएं बताई थीं, जिनसे पिछले तीन सालों से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत नहीं पड़ी है, जो कि बहुत बड़ी राहत की बात है। नितिन कहते हैं, "उसके स्कूल के सभी टीचर बहुत अच्छे और मददगार हैं। क्योंकि वह अजनबियों से बात नहीं कर पाता, इसलिए उसका कोई दोस्त नहीं है। जब हमारे रिश्तेदार और दोस्त घर आते हैं, तो वह उन्हें पहचान लेता है; वह अपने इशारों और हाव-भाव से उन्हें पहचानता है। इसी तरह, वह कुत्ता, गाय और बकरी जैसे पालतू जानवरों को भी पहचान सकता है।"
 
अमन रोज़ सुबह 9 बजे से शाम 4.30 बजे तक स्कूल जाता है। वह बिल्डिंग ब्लॉक्स को सही जगह पर रखता है और लकीरें खींचता है क्योंकि वह लिख नहीं सकता। रोज़मर्रा की ज़िंदगी के ज़रूरी हुनर ​​सीखना उसकी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा है। घर पर वह छोटी-छोटी चीज़ों में खुशियाँ ढूँढ़ता है: जैसे अपने खिलौनों से खेलना, अपनी तिपहिया साइकिल चलाना और पापा की बाइक पर घूमना। उसे नितिन के मोबाइल पर कार्टून फ़िल्में देखना बहुत पसंद है; एक बार जब उसे मोबाइल चालू करके दे दिया जाता है, तो उसे यूट्यूब (YouTube) पर अपनी पसंदीदा फ़िल्में चुनना आता है। उसे कसरत करना पसंद है और ज़्यादातर बच्चों के उलट, जिन्हें नहाना पसंद नहीं होता, उसे नहाना बहुत अच्छा लगता है! उसे खाने-पीने का भी बहुत शौक है: दाल-चावल के अलावा उसे छाछ, पकौड़े और मंचूरियन जैसे स्नैक्स पसंद हैं, और नींबू का शरबत तो उसे बहुत ही ज़्यादा पसंद है।
 
अमन के माता-पिता स्वाभाविक रूप से उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उसके विकास के लिए लगातार और पक्की मदद कैसे मिलेगी। उम्मीद है कि उसके परिवार और टीचर का अटूट प्रोत्साहन उसे एक ज़्यादा आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाएगा। 


तस्वीरें:

विक्की रॉय