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    "result": {"pageContext":{"language":"hi","pathURL":"pintuben-meda","isDefaultLanguage":false,"storyData":{"Name":"पिंटूबेन मेडा","Alt_Photos":null,"Alt_Text_Photo1":"Pintuben Meda (19) stands in a shady grove, in the midst of guava trees, next to a bush with red inflorescence. She wears crimson pants and a mustard-coloured chunky cotton cardigan with zippered side-pockets, a zip-up front, and a hoodie. The hoodie is pushed back, revealing black spiky hair. She smiles as she holds the stem of a spikelet of red flowers.","Alt_Text_Photo2":"Pintu sits cross-legged on a mattress on an iron bedstead painted yellow. The room is a dormitory with two rows of similar cots lining the length of the two facing peach-coloured walls. The cots are sunny yellow, post-box red, leaf-green, and ash-grey. Each mattress is covered with a bedsheet in broad alternating bands of white and bluish-grey. Pintu wears a bluish-green T-shirt and loose peach-coloured pants. Her right forearm rests on her right thigh. Holding a black marker-pen in her left hand, she is shading an outline drawn on a white sheet of paper.","Alt_Text_Photo3":"A grinning Pintu stands indoors with arms outstretched horizontally such that her body forms the letter T. She wears a lemon-yellow T-shirt and loose crimson pants. The floor has white tiles. The white painted crisscrossing grills of a rolling shutter gate have been partly drawn to either side of her.","Alt_Text_Photo4":"Pintu, wearing peach pants and blue-green T-shirt, stands in a room with peach-coloured walls. To the right there are two sets of smoky grey lockers side by side. Each set of 12 lockers forms a grid of four by three. Each locker has a piece of white paper stuck to it. On each paper is written the name of the person who uses it.","Alt_Text_Photo5":"Pintu sits next to the hostel warden Sonalben (43) on a metal bench in a paved courtyard. Sonal smiles as she turns to look at Pintu and puts her left arm around Pintu’s shoulder. Pintu grins as she looks straight into the camera. She wears her yellow T-shirt and crimson pants. Her feet are shod in white socks and slippers with magenta straps. Sonalben wears a salmon pink sweater over a bluish-green kameez printed with large white flowers. She wears a dark chocolate salwar and ash-grey slip-on canvas shoes. The ground is made of faded pink zigzag paving stones. In the ivory-white wall in the background there is a wide doorway with rolling shutter grill gate painted white.","Alt_Text_Video":null,"Photo1_URL":"https://egsweb.s3.ap-south-1.amazonaws.com/Pintuben/_O2A8995.jpg","Photo2_URL":"https://egsweb.s3.ap-south-1.amazonaws.com/Pintuben/_O2A9165.jpg","Photo3_URL":"https://egsweb.s3.ap-south-1.amazonaws.com/Pintuben/_O2A9052.jpg","Photo4_URL":"https://egsweb.s3.ap-south-1.amazonaws.com/Pintuben/_O2A9214.jpg","Photo5_URL":"https://egsweb.s3.ap-south-1.amazonaws.com/Pintuben/_O2A9012.jpg","Name_English":"Pintuben Meda","Language":"hi","Disability":["recqkJ0sfTCGlqJlR"],"Gender":"Female","Instagram_Content":null,"Quote":"“मुझे गरबा डांस करना बहुत पसंद है। अगर मेरे पास करने के लिए कुछ न हो, तो मैं बेचैन हो जाती हूँ।”","Status":"Published","Video":null,"Website_Content":"पाँच साल पहले, विलांग बच्चों का एक ग्रामीण सर्वे करते समय, गुजरात में ‘ब्लाइंड वेलफेयर काउंसिल’ स्कूल के कर्मचारियों को एक अनोखा परिवार मिला। एक दिहाड़ी मज़दूर दंपति के आठ बच्चे थे, जिनमें से पाँच विकलांग थे: एक को हड्डियों से जुड़ी समस्या थी और चार को ‘माइक्रोसेफ़ली’ (एक ऐसी स्थिति जिसमें बच्चा असमान रूप से छोटे सिर के साथ पैदा होता है) था, जो दिमाग के विकास पर असर डालती है।\n \nईजीएस  के पाठकों को शायद युसुफ़ी कपाड़िया की कहानी याद होगी, जिन्होंने दाहोद और पंचमहल ज़िलों के आदिवासी और पिछड़े इलाकों में (सिर्फ़ दृष्टिहीन ही नहीं, बल्कि) अलग-अलग तरह की विकलांगता वाले लोगों की सेवा के लिए ‘ब्लाइंड वेलफेयर काउंसिल’ ट्रस्ट की स्थापना की थी। ट्रस्ट की कई पहलों में शिक्षा, पुनर्वास, रोज़गार के लिए आजीविका प्रशिक्षण, खेल गतिविधियों में छात्रों की मदद करना और सहायक उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है।\n \nस्कूल के कर्मचारी उन विलकांग बच्चों को खोजने के लिए घर-घर जा रहे थे, जिनका वे अपने स्कूल में दाखिला करवा सकें; इस आवासीय स्कूल में 100 से ज़्यादा बच्चे रहते हैं, जिन्हें अलग-अलग तरह की विकलांगताएं हैं, और जिन्हें यहाँ रहने-खाने, शिक्षा और प्रशिक्षण की सुविधा मुफ़्त मिलती है। जब वे ‘छत्रभाई’ के घर पहुँचे, तो उन्हें तीन लड़कियाँ और एक लड़का मिला, जिन्हें ‘माइक्रोसेफ़ली’ था (इसका एक संभावित कारण वंशानुगत आनुवंशिक असामान्यता हो सकती है)। उन्होंने बच्चों के माता-पिता को समझाया-बुझाया, और वे बच्चों का दाखिला करवाने के लिए राज़ी हो गए। लेकिन सबसे पहले कागज़ी कार्यवाही पूरी करनी थी, और उन बच्चों में से सिर्फ़ ‘पिंटुबेन मेडा’ के पास ही आधार कार्ड और ज़रूरी प्रमाण पत्र मौजूद थे।\n \nकिस्मत से, पिंटुबेन - जो अब 18 साल से ज़्यादा उम्र की हैं - ‘ब्लाइंड वेलफेयर काउंसिल’ स्कूल में बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही हैं। स्कूल की प्रिंसिपल ‘राधिका सिंह’ याद करते हुए बताती हैं, “शुरुआत में हमने पिंटू के भाई को भी स्कूल में लाने की कोशिश की थी - जिसे गंभीर स्तर का ‘माइक्रोसेफ़ली’ है - लेकिन हम कुछ दिनों से ज़्यादा उसे संभाल नहीं पाए।” यहाँ तक कि स्कूल के प्रशिक्षित कर्मचारी भी उसकी अत्यधिक चंचलता और अपने देखभाल करने वालों के प्रति उसके हिंसक व्यवहार को संभाल नहीं पाए। हालाँकि, पिंटू की कहानी बिल्कुल अलग है।\n \nराधिका - जो दो साल के ‘शिक्षक प्रशिक्षण डिप्लोमा’ कोर्स की कोऑर्डिनेटर भी हैं - स्कूल के उद्देश्यों के बारे में बताती हैं; वे साल 2002 से इस स्कूल में काम कर रही हैं। यहाँ दी जाने वाली शिक्षा सिर्फ़ किताबों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ ‘जीवन-कौशल’ (लाइफ़ स्किल्स) पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है: जैसे – निजी साफ़-सफ़ाई और अपनी देखभाल करना; लोगों से बातचीत करने और घुलने-मिलने के बुनियादी तरीके सीखना; घर के छोटे-मोटे काम और कोई आसान सा हुनर ​​सीखना; और कला, शिल्प व शारीरिक गतिविधियों के ज़रिए अपनी भावनाओं को रचनात्मक रूप से व्यक्त करना। बच्चे पूरे समय कैंपस में ही रहते हैं, और सिर्फ़ बड़े त्योहारों और गर्मियों की छुट्टियों में ही अपने परिवारों के पास जाते हैं। कई गरीब परिवारों के लिए, यह व्यवस्था राहत और उम्मीद, दोनों देती है।\n \nराधिका बताती हैं कि हर बच्चे को उसकी काबिलियत के हिसाब से गाइड किया जाता है, न कि किसी सख्त सिस्टम में ज़बरदस्ती डाला जाता है। शुरू से ही यह साफ़ था कि पिंटू की ताकतें पारंपरिक पढ़ाई-लिखाई से बाहर हैं। उसे पढ़ने, लिखने और हिसाब-किताब करने में दिक्कत होती है, और उसकी बोली भी साफ़ नहीं है, लेकिन वह अपनी इच्छाओं और भावनाओं को अपने कामों और हाव-भाव से ज़ाहिर करती है। उसकी सबसे खास खूबियों में से एक है उसका डांस के प्रति प्यार। राधिका कहती हैं, “जब म्यूज़िक बजता है, तो वह एकदम खिल उठती है।” “वह बिना थके, एकदम सही ताल में, घंटों तक डांस कर सकती है।” उसे खास तौर पर गरबा करना पसंद है, जो गुजरात का पारंपरिक लोक नृत्य है। म्यूज़िक से उसका जुड़ाव स्वाभाविक और बहुत गहरा है; भले ही वह गानों के बोल ठीक से बोल न पाए, लेकिन वह लोक गीतों के साथ गुनगुनाती ज़रूर है, खासकर शादी-ब्याह में गाए जाने वाले गाने।\n \nपिंटू को तस्वीरों में रंग भरना और आसान क्राफ़्ट का काम करना पसंद है। वह घर के कामों में, जैसे कपड़े सुखाना और उन्हें तह करके रखना, सफ़ाई करना, वगैरह में बड़े उत्साह से हाथ बँटाती  है, और छोटे बच्चों की देखभाल में भी मदद करती है। राधिका कहती हैं, “अगर उसे कोई काम न दिया जाए, तो वह बेचैन हो जाती है।” “उसे हर समय किसी न किसी काम में लगे रहना पसंद है।” उसे रंग-बिरंगे कपड़े पहनना, मेहंदी लगाना, चूड़ियाँ पहनना, और अपने पहनावे के लिए तारीफ़ पाना और लोगों की नज़र में आना बहुत पसंद है।\n \nराधिका का इस क्षेत्र में आने का सफ़र न तो अचानक शुरू हुआ और न ही आसान था। जब काउंसिल के डायरेक्टर ने पहली बार उनसे संपर्क किया, तो वे हिचकिचाई थीं। उस समय उन्हें किसी गाँव-देहात वाले इलाके में काम करने का विचार बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था, और यहाँ तक कि उनके माता-पिता भी उन्हें वहाँ भेजने को राज़ी नहीं थे। लेकिन डायरेक्टर ने उन्हें हिम्मत दी कि “एक बार बस जाकर देख तो लो।” वे कहती हैं कि उस एक बार के दौरे ने ही सब कुछ बदल दिया। उन्हें उस जगह का सुकून, सादगी और वहाँ के काम का मकसद बहुत भा गया। पिछले 24 सालों से, वह न सिर्फ़ एक संस्था बनाने में मदद कर रही हैं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक प्यार भरा घर भी बना रही हैं, जिन्हें खास देखभाल और ध्यान की ज़रूरत है – ऐसे बच्चे, जैसे कि पिंटूबेन मेडा।\n","State_name":"गुजरात","Display_Order":257}}},
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